Govardhan Puja 2025 kab hai: अमावस्या तिथि में नहीं होती गोवर्धन पूजा! जानें कब ये पर्व मनाना होगा सही

Govardhan Puja 2025 kab hai: अमावस्या तिथि में नहीं होती गोवर्धन पूजा! जानें कब ये पर्व मनाना होगा सही

Govardhan Puja 2025 kab hai: अमावस्या तिथि में नहीं होती गोवर्धन पूजा! जानें कब ये पर्व मनाना होगा सही

हर साल दीपावली के अगले दिन मनाई जाने वाली Govardhan Puja हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र देव के अभिमान को तोड़ने और प्रकृति की पूजा के संदेश के रूप में मनाया जाता है। 2025 में यह सवाल सबके मन में है — “गोवर्धन पूजा 2025 कब है?” क्योंकि कई बार अमावस्या और प्रतिपदा तिथि के संयोग से लोगों को उलझन होती है।

Govardhan Puja 2025 kab hai: अमावस्या तिथि में नहीं होती गोवर्धन पूजा! जानें कब ये पर्व मनाना होगा सही

Govardhan Puja क्या है?

गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) को अन्नकूट पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग गोवर्धन पर्वत, गाय, और प्रकृति की पूजा करते हैं। यह पर्व कृष्ण भक्ति, कृषि संस्कृति, और प्रकृति के सम्मान का प्रतीक है।

Govardhan Puja (गोवर्धन पूजा) का धार्मिक महत्व

इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने लोगों को यह सिखाया कि प्रकृति और पर्यावरण की सेवा सबसे बड़ा धर्म है। इंद्र देव की पूजा छोड़कर जब गोकुलवासियों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की, तब भगवान कृष्ण ने स्वयं अपनी उंगली पर पर्वत उठाकर सबकी रक्षा की।

गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा

भगवान श्रीकृष्ण और इंद्र देव का प्रसंग

कहते हैं, एक बार गोकुलवासी इंद्र देव की पूजा करते थे ताकि वर्षा ठीक हो। श्रीकृष्ण ने कहा — “हमारी वर्षा और जीवन का स्रोत तो यह गोवर्धन पर्वत है, जो गायों के लिए घास और मनुष्यों के लिए अन्न देता है।” इस पर सभी ने इंद्र की पूजा बंद कर दी।

Govardhan पर्वत की पूजा का आरंभ

इंद्र देव ने क्रोधित होकर भयंकर वर्षा कर दी, तब श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सबकी रक्षा की। तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू हुई।

दीपावली और गोवर्धन पूजा का संबंध

दीपावली की रात के बाद अगले दिन कार्तिक मास की शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा होती है। यह दिन नए वर्ष की शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

2025 में गोवर्धन पूजा कब है?

2025 में गोवर्धन पूजा बुधवार, 22 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी।
उस दिन अमावस्या समाप्त होकर प्रतिपदा तिथि आरंभ होगी, इसलिए पूजा उसी दिन की जाएगी।

क्यों अमावस्या तिथि में नहीं होती गोवर्धन पूजा

पंचांग के अनुसार तिथि का महत्व

गोवर्धन पूजा अमावस्या में नहीं की जाती क्योंकि यह शुभ तिथि नहीं मानी जाती। पूजा शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि में होती है, जब नया चंद्र मास आरंभ होता है।

पूजा की सही तिथि कैसे तय की जाती है

अगर किसी वर्ष दीपावली और प्रतिपदा एक ही दिन हो जाएं, तो गोवर्धन पूजा अगले दिन मनाई जाती है। यही कारण है कि हर साल तिथि में थोड़ा परिवर्तन होता है।

2025 में गोवर्धन पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त

  • तिथि: बुधवार, 22 अक्टूबर 2025
  • पूजा मुहूर्त: सुबह 6:30 बजे से दोपहर 10:00 बजे तक (स्थानीय समय अनुसार)
  • प्रदोष काल: शाम 5:30 बजे से 8:00 बजे तक
  • अन्नकूट दर्शन: पूरे दिन किया जा सकता है

गोवर्धन पूजा का सही तरीका

गोवर्धन बनाने की विधि

इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाया जाता है, जिसमें पेड़, पशु, और नदियों की आकृतियाँ भी सजाई जाती हैं। यह पर्वत धर्म, अन्न और प्रकृति के प्रतीक स्वरूप तैयार किया जाता है।

पूजा सामग्री

  • गोबर या मिट्टी
  • जल, दूध, दही, घी, शहद
  • फूल, दीपक, धूप
  • तुलसी पत्र
  • नैवेद्य (भोजन)

पूजा विधि चरणबद्ध

  1. गोवर्धन पर्वत बनाएं।
  2. दीपक जलाकर श्रीकृष्ण का स्मरण करें।
  3. पंचामृत से अभिषेक करें।
  4. अन्नकूट भोग लगाएं।
  5. गायों की परिक्रमा करें और अन्न वितरण करें।

अन्नकूट का महत्व और परंपरा

इस दिन घरों में 56 भोग या अन्नकूट तैयार किया जाता है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किया जाता है। यह समृद्धि और कृतज्ञता का प्रतीक है।

ग्रामीण क्षेत्रों में गोवर्धन पूजा की विशेषता

गांवों में यह पर्व गौ-सेवा, खेतों की पूजा, और गाय-बैल सजाने के साथ मनाया जाता है। किसान इसे प्रकृति के प्रति धन्यवाद के रूप में मनाते हैं।

शहरी क्षेत्रों में गोवर्धन पूजा का रूप

शहरों में मंदिरों और घरों में गोवर्धन पर्वत की प्रतिकृति बनाई जाती है। भक्तजन अन्नकूट दर्शन करते हैं और श्रीकृष्ण मंदिरों में भव्य आयोजन होते हैं।

गोवर्धन पूजा के दौरान क्या करें और क्या न करें

क्या करें:

  • गाय और गोवर्धन की पूजा करें।
  • गरीबों में भोजन बाँटें।
  • घर में दीपक जलाएं।

क्या न करें:

  • इस दिन किसी का अपमान न करें।
  • झूठ या क्रोध से बचें।
  • पूजा के समय मांसाहार या शराब का सेवन न करें।

आध्यात्मिक लाभ और धार्मिक मान्यता

गोवर्धन पूजा करने से व्यक्ति को धन, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि प्रकृति ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।

निष्कर्ष

गोवर्धन पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है। 2025 में यह पर्व 22 अक्टूबर को पूरे भारत में हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। इस दिन श्रीकृष्ण की भक्ति के साथ-साथ प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प भी लिया जाता है।


FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. गोवर्धन पूजा 2025 में कब है?
22 अक्टूबर 2025, बुधवार को।

2. क्या गोवर्धन पूजा अमावस्या को होती है?
नहीं, यह शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है।

3. गोवर्धन पूजा क्यों मनाई जाती है?
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र देव के अभिमान को तोड़ने और प्रकृति के सम्मान में यह पर्व मनाया जाता है।

4. अन्नकूट क्या है?
यह भोजन का पर्व है जिसमें विविध प्रकार के व्यंजन बनाकर भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाते हैं।

5. गोवर्धन पूजा का मुख्य संदेश क्या है?
प्रकृति की रक्षा, कृतज्ञता, और भगवान के प्रति भक्ति — यही इसका मूल संदेश है।

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